Friday, 27 February 2026

A *वाचो वेगं मनसः क्रोध-वेगं

 A

*वाचो वेगं मनसः क्रोध-वेगं
जिह्वा-वेगं उदरोपस्थ-वेगम् ।
एतान् वेगान् यो विषहेत धीरः
सर्वामपीमां पृथिवीं स शिष्य्यात् ॥* ‎<This message was edited>

अर्थ: जो व्यक्ति वाणी के वेग, मन के वेग, क्रोध के वेग, जीभ के वेग (स्वाद), पेट के वेग और जननेन्द्रिय के वेग को सहन (नियंत्रित) कर सकता है, वह धीर पुरुष है और वह पूरी पृथ्वी पर शिष्यों को शिक्षा देने योग्य गुरु बन सकता है।

*सरल हिन्दी अर्थ*

जो व्यक्ति —
*वाणी के वेग* (अनावश्यक बोलने की इच्छा),
*मन के वेग* (चंचल विचारों की गति),
*क्रोध के वेग,*
*जिह्वा के वेग (* स्वाद की लालसा),
*उदर के वेग* (अधिक खाने की इच्छा),
*उपस्थ के वेग* (कामवासना)

— इन सभी वेगों को सहन और नियंत्रित कर लेता है, वह धीर (स्थिर बुद्धि वाला) व्यक्ति कहलाता है।
ऐसा धीर व्यक्ति पूरी पृथ्वी पर लोगों को शिक्षित करने (शिष्य बनाने) के योग्य होता है।
जिह्वा-वेगं उदरोपस्थ-वेगम् ।
एतान् वेगान् यो विषहेत धीरः
सर्वामपीमां पृथिवीं स शिष्य्यात् ॥* ‎<This message was edited>

अर्थ: जो व्यक्ति वाणी के वेग, मन के वेग, क्रोध के वेग, जीभ के वेग (स्वाद), पेट के वेग और जननेन्द्रिय के वेग को सहन (नियंत्रित) कर सकता है, वह धीर पुरुष है और वह पूरी पृथ्वी पर शिष्यों को शिक्षा देने योग्य गुरु बन सकता है।

*सरल हिन्दी अर्थ*

जो व्यक्ति —
*वाणी के वेग* (अनावश्यक बोलने की इच्छा),
*मन के वेग* (चंचल विचारों की गति),
*क्रोध के वेग,*
*जिह्वा के वेग (* स्वाद की लालसा),
*उदर के वेग* (अधिक खाने की इच्छा),
*उपस्थ के वेग* (कामवासना)

— इन सभी वेगों को सहन और नियंत्रित कर लेता है, वह धीर (स्थिर बुद्धि वाला) व्यक्ति कहलाता है।
ऐसा धीर व्यक्ति पूरी पृथ्वी पर लोगों को शिक्षित करने (शिष्य बनाने) के योग्य होता है।

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